पिछले हजारों सालों में महिलाओं की स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है। पहले के जमाने में महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर पाबंदी थी। उनके जीवन का लक्ष्य यही था कि उन्हें पति बच्चों का ख्याल रखना है।
भारत के आजाद होने के बाद महिलाओं की दशा में काफी सुधार हुआ है। महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार मिलने लगे हैं। महिलाएं अब वे सब काम आजादी से कर सकती हैं। जिन्हें वे पहले करने में अपने आप को असमर्थ महसूस करती थी। हमारे देश की आधी जनसंख्या का प्रति निधित्व महिलाएं करती हैं। इसका मतलब देश की उन्नति का आधा भार महिलाओं पर और आधा पुरुषों के कंधों पर निर्भर करता है। हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते उस समय का जब इसी आधी जनसंख्या को वह मूलभूत अधिकार भी नहीं मिल पाते थे। जिनके वह हकदार हैं, आज महिलाएं एक समाज सुधारक, प्रशासनिक सेवक आदि है।
महिलाएं अब लोकतंत्र और मतदान संबंधी कार्यों में भी काफी अच्छा काम कर रही हैं। जिससे देश की प्रशासनिक व्यवस्था सुधर रही है। हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। उदाहरण के तौर पर मतदान के दिन मतदान केंद्र पर हमें पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की उपस्थिति नजर आएगी। इंदिरा गांधी, विजय लक्ष्मी पंडित, एनी बेसेंट, महादेवी वर्मा, कल्पना चावला, मदर टेरेसा आदि। कुछ ऐसे नाम जिन्होंने महिलाओं की जिंदगी के मायने बदल कर रख दिए हैं। आज नारी, बेटी, मां, बहन, पत्नी के रूप में अलग-अलग क्षेत्र जैसे सामाजिक, राजनीति, आर्थिक, शिक्षा, विज्ञान तथा और विभागों में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
भारत सरकार ने हाल ही में महिला सुरक्षा से संबंधित कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पुराने जुवेनाइल कानून 2000 को बदलते हुए नए जुवेनाइल जस्टिस (चिल्ड्रन केयर एंड प्रोटक्शन) बिल 2015 को लागू किया है। इस कानून के अंतर्गत कोई भी किशोर जिसकी आयु 16 से 18 साल के बीच है और वह किसी अपराध में शामिल है। तो उस पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जा सकेगी।
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