Sunday, 31 March 2019

जो चल रहा है...

आज हम बात करेगें नैतिकता, प्रेम, उपासना, सम्मान और विचारधारा की जो आज हमें कितनी आगे लेकर आ गयी है, विचारो की बात कही जाए तो ऐसी कई सारी बातें हैं जो हमारे मन में आती हैं ये कोई नहीं जानता पर इसमें कोई शक नहीं हम आज कितनी आगे बढ़ चुके हैं। हम सभी में से किसी को भी ये याद नहीं रहता कि हम सभी कितना कुछ अपने जीवन के पीछे छोङकर आगे जा चुके हैं। लेThe किन कोई बात नहीं समय-समय पर एेसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती रहती हैं जो हमें हमारे जीवन के ऐसे दृश्यो को दिखाती है जो अच्छे और बुरे अनुभवों से होकर गुजरे हैं। अब मैं हम सभी की एक और आदत जिसे हम अपना स्वभाव भी कह सकते हैं, जिसे समझाने के लिए हम अनेक प्रकार के तौर-तरीक़े अपनाते हैं वो जिसे हम अपनी आदत बना लेतें हैं वो है -‘अपनी बातों को बङा-चङाकर बोलने की आदत' हमारी ये आदत हमारे आस-पास और खुद हमें मुख्य रुप से प्रभावित करती है।

हमारा स्वभाव ही हमारी कई कमियों और कई खूबियों को हमारे सामने ले आता है जिसे हम अपनी खुली आँखो से नहीं देख पातें उन्हीं आँखो से हमारे कई सारे काम ऐसे होते हैं जिन्हें हम नहीं देखना चाहते लेकिन फिर भी वह सभी दृश्ये हमारे सामने आ जाते हैं, स्वभाव को केवल एक जरिया माना जाता है अपने आप को जानने का समझने का।

अब बात की  जाए नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी की जो एक दूसरे को समझने में बहुत समय लेती हैं क्योकिं न नई पीढ़ी के विचार पुरानी पीढ़ी से मिलते हैं और न ही पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी की नई सोच को समझना चाहती है इन सबके बीच अब बात की जाए तालमेल की तो विचारो और सोच में तालमेल बैठाना बहुत मुश्किल हो जाता है, जब हम सभी विचारो और हमारी सोच को एक गाङी पर सवार होकर चलने की कोशिश करते हैं तो बस किसी-न-किसी तरीके से गाङी की टक्कर हो जाती है।अब हमारा ही काम होता है कि विचारूपी, सोचरूपी गाङी के सारे पहिये साथ में काम करें। क्योकिं वह हम ही होतें हैं जो अपनी सोच और समझ से काम लेतें हैं पर इसमें भी हम कभी-कभी खुद को बङों से ज्यादा बुद्धिशाली व्यक्ति

के रूप में  नजर आतें हैं, जहां परिवार में बङे छोटो को समझाते हैं तो वहीं छोटो को लगता है कि बङे उन्हें आगे बङने देना ही नहीं चाहते लेकिन गहराई से सोचने पर पता लगता है कि हम कितनी बङी गलती कर रहे थे क्योकिं बङो की सोच अधिक अनुभवी होती है पर इसमें ये कहा नहीं जा सकता कि हमारे बङे जो कहते हैं वो हमेशा सही होता है क्योकिं कभी-कभी बङो की सोच भी पुरातनपंथी हो जाती है। जहां हमेशा सही बात न होने की बात आती है, वहीं कहीं-न-कहीं कई सारी ऐसी बातें जो हमारी सोच के परे होती हैं वो हमें हमारे बुजुर्गो से सीखने मिलती हैं इसलिए कभी-भी स्वयं को बङो या किसी से भी अधिक ज्ञानी सोच वाला नहीं कहा जा सकता।

    एक कहानी में जहां माँ अपने बेटे से कहती रहती है अच्छे आचरण में रहोगे तो एक कामयाब इसांन के रूप में दुनिया को दिखोगे वहीं बेटा सोचने लगता है सिर्फ एक बार कोई मुझे यह बताए कि हमेशा माँ या कोई भी बङा मुझे समझाता रहता है, सिखाता रहता है।आगे चलकर किसी-न-किसी रूप में हमें माँ की दी हुई सीख याद आती है और हम इसी बजह से खुद को एक कामयाब इसांन की गिनती में गिन पातें हैं।

  जिस तरह हम अपने शहीदों और जवानों की तारीफ करते हैं, वहीं उनकी वीर कथाओं को एक-दूसरे से कहतें हैं क्योकिं हम सभी जानतें हैं कि जो व्यक्त अच्छा काम करता है वही आगे बङ सकता है क्योकिं जरूरी नहीं है अमीर और ज्ञानी व्यक्ति ही उच्च स्थान की शोभा होता है बल्कि एक साधारण इसांन अपनी ताकत दिखाए तो बङे-से-बङे नामी व्यक्त की कुर्सी हिला सकता है इससे ये पता चलता है कि पहले सब एक साधारण व्यक्तित्व के रूप में हैं बाद में नामी व्यक्त के रूप में उनकी पहचान है। पहचान बनाने की बात कही जाए तो पहचान व्यक्ति के अच्छे-बुरे कामो से बनती है, इसमें केवल एक ही भिन्नता होती है अच्छी पहचान बनाने वाले व्यक्ति को सभी जानतें हैं और बुरी पहचान वाले व्यक्ति कोसब जानना चाहते हैं क्योकिं अच्छी पहचान वाला व्यक्ति सबकी नजर में रहकर काम करता है और एक अच्छी पहचान बनाता है और वहीं बुरी पहचान वाला व्यक्ति नजरे चुराकर सारे काम करता है और लोग यही जानना चाहते हैं कि इस व्यक्ति ने ऐसा क्या काम किया जिसकी बजह से इसकी बुरी पहचान इसके बुरे कामो की बजह से है तो इसनें जो बुरे काम किए हैं उन बुरे कामो को न दोहराए

क्योकिं इन्हीं बुरी आदतों के कारण समाज में हमारी बुरी पहचान बनेगी। 

 सभी प्रकार से बुरी और अच्छी आदतें हम सभी के अंदर होती हैं लेकिन ये हम पर निर्भर करता है कि हम समाज में अपनी अच्छी आदतों के कारण जाने जाए या बुरी आदतों की बजह से।

       यह सम्पूर्ण लेख हमारे समाज, जल-जीवन व हमारे शहीदों और जवानों को समर्पित था।

                  ! ! जय हिन्द जय भारत!! 

by- Riya Tomar

Saturday, 30 March 2019

जीवन और परीक्षा

असफलता की स्थिति में हम अपनी तुलना दूसरों से करने लगते हैं। यह बड़े भटकाव और भ्रम की स्थिति होती है। यह बात हमारा सबसे अधिक नुकसान कर जाती है। इसके कारण सबसे बड़ी समस्या यह होती है  कि  हमारा आत्मविश्वास पूरी तरह से डगमगा जाता है और हम खुद को हारे हुए होने के साथ-साथ खुद को अयोग्य समझने लगते हैं। सच पूछिए तो हम अपनी स्थिति की तुलना दूसरों से इसलिए करते हैं, क्योंकि हम इस तथ्य को भूल जाते हैं कि लगभग साढे सात अरब आबादी वाली धरती पर किसी भी दो व्यक्तियों के व्यवहार और विचार एक दूसरे से कभी नहीं मिलते हैं। इस धरती पर हर व्यक्ति अपने में असाधारण होता है।

           सच पूछिए तो इस प्रकार की  स्थिति में  समझदारी से काम करने की जरूरत होती है।घबराने से और चिंता करने से परिस्थिति और गंभीर हो सकती है। पहले तो इस बात को ध्यान में रख लीजिए कि परीक्षा का परिणाम जीवन से बड़ा नहीं होता है और यदि आप किसी परीक्षा में अच्छा नहीं कर पाते हैं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि आप उसे कर नहीं पाएंगे, और आप अपने जीवन की सारी बाजियां हार गए हैं। इस दुनिया में असफलता को बिना अपना आपा खोए हुए जो व्यक्ति अपने आप पर झेल लेता है। उसके जैसा साहसी व्यक्ति कोई नहीं होता है। परीक्षा परिणाम के संकट की स्थिति में खुद पर नियंत्रण रखें, दिल को मजबूत रखें और भावनाओं में बिल्कुल नहीं बहें।

           असफलता की स्थिति में सबसे पहले यह जानने की कोशिश करें कि आपसे गलतियां कहां हुई हैं। जब यह पता लग जाए कि आपसे गलती कहां हुई हैं। तो हमें उन कमजोरियों को दूर करने के लिए जी जान से हर प्रयास करना चाहिए। असफलता की स्थिति में  मन को दुखी करने के बजाय मन को फिर से मजबूत करने की कोशिश करनी चाहिए। फिर आपको कोई नहीं हरा सकता है।

 

आलिया नाज़

Friday, 29 March 2019

निर्भरता

निर्भरता शब्द-'एक ऐसा शब्द है जो दूसरों के सहारे से सभी कार्यों को पूर्ण करता है'अर्थात् 'किसी पर निर्भर रहना'. कोई भी व्यक्ति अगर अपने किसी भी कार्य के लिए दूसरों पर निर्भर है किसी के सहारे के बिना कोई काम पूरा नहीं कर सकता, उसे निर्भरता कहा जा सकता है.

    हमारे आसपास की दुनिया में 17वीं 19वीं शताब्दी के लोगों का दूसरों पर निर्भर रहना साधारण-सी बात थी, पर आज का समय दूसरों का सहारा लेना नहीं बल्कि दूसरों को सहारा देने का है. निर्भर शब्द-सहारा, सहयोग, मदद करना इनके लिए प्रयोग होता है. अधिकतर समाज द्वारा ही किसी- न-किसी के लिए सीधे या घुमाकर कहा जाता है कि यह व्यक्ति बिना सहारे के कोई भी काम नहीं कर सकता हर किसी पर अपने काम को पूरा करने के लिए निर्भर रहता है तो आपकी नजरों में आज के समय में किसे निर्भर व्यक्ति कहा जाता है? आज के समय में क्या किसी पर निर्भर रहा जा सकता है?

   नहीं

आज का समय किसी पर निर्भर रहने का ही नहीं है.बल्कि किसी व्यक्ति, दोस्त यहां तक कि किसी रिश्तेदार पर भरोसा करने का भी नहीं है. हां आज के समय में किसी परिवार वाले व्यक्ति पर भी आंख बंद करके कोई भरोसा नहीं कर सकता. क्योंकि आज के समय में भरोसा शब्द केवल शब्द है. यह केवल कहने का है, तो निर्भर रहने की बात तो भूल जाइए.

आज के समय में भरोसा करने के लिए भी कहा जाता है.

            'भरोसे पर दुनिया कायम है'

           ' भरोसा कीजिए,आंख मूंदिए'

कहावतों का क्या कहना है इनमें तो सीधी बाद भी टेढ़ी हो जाती है .जहां एक तरफ कहा जाता है. 'भरोसे पर दुनिया कायम है' वहीं दूसरी कहावत में कहा जाता है 'भरोसा कीजिए आंख मूंदिए' जिसका सीधा-सीधा अर्थ है भरोसा करो तो आंखें बंद कर लो क्योंकि गलती कभी भी हो सकती है, निर्भर रहना गलत है. अपना काम स्वयं करना चाहिए. महिला शक्ति की जानें तो एक महिला पर पूरा परिवार निर्भर रहता है वहीं परिवार में सूक्ष्म से लेकर दीर्घ कार्य पूरी करती है. इसलिए साफ शब्दों में कहा जा सकता है- कि महिलाएं हम पर नहीं बल्कि हम उन पर निर्भर रहते हैं. इसलिए एक व्यक्ति को निर्भर भी उसी पर रहना चाहिए, जिसे वह व्यवहार, विचार, सदाचार से जानता हो. व्यक्ति के लिए सफलता और खुशी एक दूसरे पर आश्रित है क्योंकि सफलता हमारे जीवन में आनंद लेकर आती है और जब हम खुश होते हैं तभी सफलता प्राप्त करते हैं, लेकिन खुश रहने के लिए सफलता पर निर्भर रहना सही नहीं है किसी पर निर्भर रहने के स्थान पर आत्मनिर्भर रहना चाहिए. आत्मनिर्भरता का अर्थ है- स्वावलम्बन आत्मनिर्भरता से यह अर्थ है स्वावलंबन  इसका यह अर्थ बिल्कुल भी नहीं है कि प्रत्येक कार्य स्वयं ही करें. आत्मनिर्भर व्यक्ति का सभी जगह सम्मान किया जाता है. इसलिए हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम आत्मनिर्भर बनें. जिससे हमें किसी पर भी निर्भर ना रहना पड़े. क्योंकि आज के समय में एक लड़की भी आत्मनिर्भरता से भरी होती है. क्योंकि उनके द्वारा भी आत्मनिर्भर बनने का प्रयास किया जाता है. जब हम आत्मनिर्भर बनेंगे तब हम खुद को निर्भर व्यक्ति से दूर पाएंगे. तभी हम एक साक्षर व्यक्ति कहलाएंगे क्योंकि साक्षर व्यक्ति कभी भी किसी पर निर्भर नहीं रहता, अपितु दूसरों को सहारा देने की सोचता है. इसलिए हमें भी स्वयं को कुछ ऐसा बनाना चाहिए. जिससे हम दूसरों को सहारा दें न कि दूसरों के सहारे से चलें. तभी हम आत्मनिर्भर व्यक्ति कहला पाएंगे.

Riya tomar

Gyanarthi media college

Thursday, 28 March 2019

भारत में महिलाओं की स्थिति

पिछले हजारों सालों में महिलाओं की स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है। पहले के जमाने में महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर पाबंदी थी। उनके जीवन का लक्ष्य यही था कि उन्हें पति बच्चों का ख्याल रखना है। 

        भारत के आजाद होने के बाद महिलाओं की दशा में काफी सुधार हुआ है। महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार मिलने लगे हैं। महिलाएं अब वे सब काम आजादी से कर सकती हैं। जिन्हें वे पहले करने में अपने आप को असमर्थ महसूस करती थी। हमारे देश की आधी जनसंख्या का प्रति निधित्व महिलाएं करती हैं। इसका मतलब देश की उन्नति का आधा भार महिलाओं पर और आधा पुरुषों के कंधों पर निर्भर करता है। हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते  उस समय का जब इसी आधी जनसंख्या को वह मूलभूत अधिकार भी नहीं मिल पाते थे। जिनके वह हकदार हैं, आज महिलाएं एक समाज सुधारक, प्रशासनिक सेवक आदि है।

           महिलाएं अब लोकतंत्र और मतदान संबंधी कार्यों में भी काफी अच्छा काम कर रही हैं। जिससे देश की प्रशासनिक व्यवस्था सुधर रही है। हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। उदाहरण के तौर पर मतदान के दिन मतदान केंद्र पर हमें पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की उपस्थिति नजर आएगी। इंदिरा गांधी, विजय लक्ष्मी पंडित, एनी बेसेंट, महादेवी वर्मा, कल्पना चावला, मदर टेरेसा आदि। कुछ ऐसे नाम जिन्होंने महिलाओं की जिंदगी के मायने बदल कर रख दिए हैं। आज नारी, बेटी, मां, बहन, पत्नी के रूप में अलग-अलग क्षेत्र जैसे सामाजिक, राजनीति, आर्थिक, शिक्षा, विज्ञान तथा और विभागों में अपनी सेवाएं दे रही हैं। 

         भारत सरकार ने हाल ही में महिला सुरक्षा से संबंधित कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पुराने जुवेनाइल कानून 2000 को बदलते हुए नए जुवेनाइल जस्टिस (चिल्ड्रन केयर एंड प्रोटक्शन) बिल 2015 को लागू किया है। इस कानून के अंतर्गत कोई भी किशोर जिसकी आयु 16 से 18 साल के बीच है और वह किसी  अपराध में शामिल है। तो उस पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जा सकेगी।